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14 May 2019 शहरों को सजीव वायुशोधकों (एयर प्यूरिफायर्स) की अधिक ज़रूरत है

हमारी अस्त-व्यस्त शहरी जिंदगी में, थकान मिटाकर राहत पाने के लिए शहर का पार्क बहुत उपयोगी होता है। पेड़ और हरियाली, विश्राम और मनोरंजन के लिए बेहतरीन सहायक होने के अलावा मानसिक स्वास्थ्य और कल्याणकारी लाभ प्रदान करते हैं।

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हमारी अस्त-व्यस्त शहरी जिंदगी में, थकान मिटाकर राहत पाने के लिए शहर का पार्क बहुत उपयोगी होता है। पेड़ और हरियाली, विश्राम और मनोरंजन के लिए बेहतरीन सहायक होने के अलावा मानसिक स्वास्थ्य और कल्याणकारी लाभ प्रदान करते हैं।

पेड़ वायु प्रदूषण को कम कम करने में भी मदद करते हैं। एक अध्ययन के अनुसार, अमेरिका में वायु गुणवत्ता और मानव स्वास्थ्य पर पेड़ों और वनों का प्रभाव, कणीय पदार्थ, जो कि फेफड़ों को विशेषरूप से नुकसान पहुंचाते हैं, वे पेड़ों की सतहों पर रूकते हैं, जबकि पत्तियां फिल्टरों की तरह काम करती हैं और प्रदूषित गैसों को सोखती हैं।

लेकिन इस अध्ययन में यह चेतावनी भी दी गई है, कि जहां पेड़, वायु प्रदूषण का प्रभाव कम कर सकते हैं, वहीं पत्तियों पर वायु प्रदूषकों के जमा होने से प्रकाशसंश्लेषण भी प्रभावित हो सकता है, और यह पेड़ों की प्रदूषण समाप्त करने की क्षमता को प्रभावित कर सकता है।'' हर चीज़ की तरह, संतुलन यहां भी महत्त्वपूर्ण है।

पेड़ों का शीतलकारक प्रभाव

पेड़, शहरों का तापमान उल्लेखनीय रूप से ठंडा भी कर सकते हैं। गर्म जलवायु में, पेड़ों का कवर, एयर कंडीशनिंग पर खर्च होने वाली बिजली कम कर सकता है, जो कि (वाहनों में) इन कूलिंग सिस्टमों को चलाने वाले वायु प्रदूषक जीवाश्म ईंधनों की खपत कम कर सकता है। अमेरिका में प्रायोगिक अनुसंधानों और मॉडलिंग अध्ययनों से मालूम चला है कि पेड़ों की छाया, पृथक घरों में एयरकंडीशनिंग का खर्च 20-30 प्रतिशत तक कम कर सकती है।

संयुक्त राष्ट्र के खाद्य एवं कृषि संगठन में एक कृषिवानिकी और नगरीय/परिनगरीय वानिकी अधिकारी सिमोन बोरेली ने बताया कि, 'पेड़, शहरों में तापमान 8°C तक घटा सकते हैं, एयरकंडीशनिंग का उपयोग कम कर सकते हैं और इससे जुड़े उत्सर्जनों को 40 प्रतिशत तक कम कर सकते हैं।'

उन्होंने आगे बताया कि, 'वृहद भूदृश्ययोजना का भाग बनने पर' शहरों में व उनके आस-पास बड़े हरे-भरे भूभाग, फैलाव तथा अत्यधिक गतिशीलता की आवश्यकताओं से बचाव द्वारा उत्सर्जनों में भी कमी करेंगे।

 
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फोटोः यूएस फॉरेस्ट सर्विस

शहरी वृक्षारोपण सही तरह से करना होगा। ऐसी प्रजातियों के पेड़ लगाए जाने चाहिए जो प्रदूषण रोकने में सबसे ज्यादा कुशल हों, विशेषकर वे जो बड़ी पत्तियों वाले होते हैं। अधिकारियों को हवा के पैटर्न और पेड़ों के बीच जगहों आदि बातों का भी ध्यान रखना होगा। यदि पानी की कमी हो, तो उनको सूखा-सहनशील प्रजातियां चुननी होंगी, और ऐसे पेड़ों से बचाव करना होगा जो परागण और एलर्जी बढाते हैं।

शहरीकरण की तेज रफ्तार को देखते हुए कदम उठाया जाना बहुत ज़रूरी हो गया है-शहरों में रहने वाले लोगों की संख्या 2030 तक 60 प्रतिशत, और 2050 तक 66 प्रतिशत हो जाएगी। इसमें से लगभग 90 प्रतिशत बढ़ोत्तरी अफ्रीका और एशिया में होगी। तीव्र वृद्धि तथा इससे जुड़ी चुनौतियों का समाधान करने के लिए, बड़े पैमाने पर प्रयास किए जाने की आवश्यकता है।

शहरों की हरी-भरी -व्यापक चहारदीवारी का निर्माण

लगभग 8,000 किमी लंबी और 15 किमी चौड़ी विशाल हरी दीवार, अफ्रीका के नेतृत्व में बहुत बड़े पैमाने पर 2007 में शुरू किया गया एक अभियान है, जो उत्तरी अफ्रीका को, सेनेगल से जबूती तक फैले एक अर्ध-शुष्क प्रदेश को पूरी चौड़ाई में हरा-भरा बनाने के लिए है। एक दशक बीत जाने, और मोटे तौर पर 15 प्रतिशत लागू हो पाने वाला यह अभियान, अफ्रीका के कुछ बंजर भूभागों को धीरे-धीरे नया जीवन दे रहा है, जो यहां रहने वाले लाखों लोगों को खाद्य सुरक्षा, नौकरियां, और रहने की वजह प्रदान करता है।

सितम्बर, 2019 में संयुक्त राष्ट्र जलवायु सम्मेलन हेतु पूर्व तैयारी करते हुए खाद्य एवं कृषि संगठन तथा अन्य साझेदारों द्वारा शहरी क्षेत्रों के लिए इसी प्रकार का एक कार्यक्रम विकसित किया जा रहा है। 2030 तक सहेल और मध्य एशिया के लगभग 90 शहरों में 500,000 हेक्टेयर नए शहरी वन तैयार करना और 300,000 हेक्टेयर तक मौजूदा प्राकृतिक वन बहाल करना या अनुरक्षित करना इसका ध्येय है। 'शहरों की विशाल हरी दीवार' बन जाने पर यह प्रतिवर्ष 0.5–5 गीगाटन कार्बन डाइऑक्साइड अवशोषित करेगी, और शताब्दियों तक के लिए कार्बन भंडारण करेगी ।

 

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बैंकाक का एक भागः शहरी हरी-भरी जगहों से मानसिक स्वास्थ्य संबंधी लाभ मिल सकते हैं। फोटोः झेर

1 मार्च 2019 को संयुक्त राष्ट्र महासभा ने संयुक्त राष्ट्र पारिस्थितिकी पुनर्प्राप्ति दशक 2021-2030 घोषित किया, पेड़ लगाने वाले कार्यक्रमों को और गति प्रदान करेगा।

“संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम जलवायु परिवर्तन कम करने, तथा भूमि आधारित जैवविविधता, जिसका 80 प्रतिशत वनों में है, बढ़ाने के एक प्रमुख उपाय के रूप में पेड़ लगाने को बढ़ावा देता है।” ऐसा संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम की ताज़े जल, भूमि और जलवायु शाखा के प्रमुख, तथा वन एवं भूदृश्य पुनर्प्राप्ति पर वैश्विक साझेदारी के अध्यक्ष टिम क्रिस्टोफर्सन ने बताया। “हम पूरी दुनिया में पारिस्थितिकी पुनर्प्राप्ति हेतु वृक्षारोपण को बढ़ावा देने के लिए साझेदारों के साथ मिलकर काम कर रहे हैं। पृथ्वी पर पहले से मौज़ूद 3 लाख करोड़ पेड़ों के अलावा एक लाख करोड़ पेड़ और लगाने की गुंजाइश है। लेकिन इसे सही तरह से करना होगा, स्थानीय समुदायों द्वारा समर्थित स्वदेशी पेड़ों को लगाना, यह करने का एक अच्छा तरीका है।”

पत्थरों पर उगाएं मॉस की हरियाली

वन पारिस्थितिकी में हवा को केवल पेड़ ही साफ नहीं करते। बर्लिन, जर्मनी में ग्रीनसिटी सॉल्युशंस की एक महत्त्वाकांक्षी परियोजना में एक अन्य प्राकृतिक वायुशोधकः-मॉस के अनेक उच्च-तकनीक आधारित प्रयोगों का प्रयास किया जा रहा है।

ग्रीनसिटी सॉल्युशंस ने बताया कि, “कुछ विशेष प्रकार की मॉस की वायु से कणीय पदार्थों और नाइट्रोजन ऑक्साइड जैसे प्रदूषकों को फिल्टर करने की क्षमता, उनको आदर्श प्राकृतिक वायुशोधक बनाती है।”

“लेकिन शहरों में, जहां हवा को शुद्ध कर पाना एक बड़ी चुनौती है, वहां पानी और छाया की ज़रूरत वाले मॉसेस का जीवित रह पाना ही एक बड़ी समस्या है। मॉसेज को अद्वितीय इंटरनेट ऑफ थिंग्स तकनीक पर आधारित पूर्ण स्वचालित पानी और पोषक तत्वों के प्रावधान के साथ जोड़कर इस समस्या को हल किया जा सकता है।”

या अधिक पेड़ लगाकर, जो छाया और नमी प्रदान करेंगे, जिससे मॉसेज को रूकने और बढ़ने में मदद मिलेगी।

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फोटोः विकीमीडिया कॉमन्स

 

05 जून, 2019 को मनाए जाने वाले विश्व पर्यावरण दिवस की थीम वायु प्रदूषण है। जिस हवा में हम सांस लेते हैं, वह हमारे दैनिक जीवनशैली विकल्पों पर निर्भर करती है। वायु प्रदूषण आपको किस तरह प्रभावित करता है, तथा हवा को साफ करने के लिए क्या किया जा सकता है, इस बारे में अधिक जानें। अपने उत्सर्जन प्रभाव कम करने, और #करेंगेसंगवायुप्रदूषणसेजंग के लिए आप क्या कर रहे हैं?

2019 विश्व पर्यावरण दिवस चीन द्वारा आयोजित किया जा रहा है।

अधिक जानकारी के लिए कृपया टिम क्रिस्टोफर्सन से संपर्क करें।

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